CORONA EMERGENCY : आगरा में कार की छत पर शव रखा होने का वायरल हुआ था फोटो, ये था उसका असली सच

CORONA EMERGENCY : आगरा में कार की छत पर शव रखा होने का वायरल हुआ था फोटो, ये था उसका असली सच

कार की छत पर शव रखा होने की बात कहकर ये फोटो वायरल हुई थी।

आगरा में इंटरनेट मीडिया में 23 अप्रैल को कार का फोटो इंटरनेट मीडिया में वायरल हुआ था। कार की छत पर शव रखे होने का दावा किया गया था। वायरल फोटो शमशान घाट का बताया गया था। जागरण ने जब पड़ताल की तो वायरल फोटो का सच कुछ और निकला।

फोटो शमशान घाट का नहीं बल्कि आगरा कालेज के सामने क्षेत्र बजाजा कमेटी कार्यालय पर लिया गया था। कार की छत पर शव नहीं, सिर्फ तैयार हुई अर्थी थी।

ये था पूरा मामला

लोहामंडी की जयपुर हाउस कालोनी के रहने वाले योगेश जौहरी (67 वर्ष) पंजाब नेशनल बैंक के सेवानिवृत्त कर्मचारी थे। बेटे रचित जौहरी ने बताया कि पिता योगेश की कई दिन से तबीयब खराब चल रही थी। उनकी कोरोना की जांच कराने पर रिपोर्ट पाजीटिव आई। अचानक उनका आक्सीजन लेबल कम हो गया।इस पर घर में ही आक्सीजन के सिलिंडर की व्यवस्था की।

आक्सीजन लगाने पर पिता का उनकी स्थिति सामान्य हो गई। उनका आक्सीजन लेबल 98 हो गया। मगर,आक्सीजन हटाते ही उसका लेबल कम हो जाता। पिता हार्ट पेशेंट और डायबीटिज के रोगी थे। इसलिए डाक्टरों से सलाह करने पर उन्हाेंने अस्पताल में भर्ती कराने की कहा। रचित ने बताया इसके बाद उन्होंने पिता को भर्ती कराने के लिए अस्पतालों में बेड तलाशना शुरू किया।

23 अप्रैल की सुबह कराया था भर्ती 

रचित ने बताया कि काफी प्रयासों के बाद उन्हें खंदारी के एक अस्पताल में पिता के लिए बेड मिल गया। वह 23 अप्रैल की सुबह पिता योगेश जौहरी को कार से लेकर अस्पताल पहुंचे। वहां पर रुपये जमा कराने के साथ ही पिता को भर्ती करा दिया। रचित के अनुसार वह खुश थे कि पिता का अब सही से इलाज हो जाएगा।वह जल्दी स्वस्थ हो जाएंगे। पिता को मोबाइल देकर आए थे। इससे कि जरूरत होने पर वह उन्हें फोन कर सकें। वह पिता को भर्ती कराके घर लौट रहे थे। क्योंकि घर पर अकेली मां मौजूद थीं। उनका भी ख्याल रखना था।

आधा घंटे बाद ही आया पिता का फोन

 रचित ने बताया कि वह रास्ते में थे। उनकी कार पंचर हो गई थी। इसी बीच पिता ने उन्हें फोन किया। बताया कि सांस लेने में दिक्कत हो रही है। वह रास्ते से ही भागकर अस्पताल पहुंचे। वहां पाया कि स्टाफ के लोग पिता के इलाज के लिए भागदौड़ कर रहे हैं। मगर, कुछ देर बाद ही स्टाफ ने बताया कि पिता की हार्ट अटैक पड़ा था। वह उन्हें नहीं बचा सके। रचित जौहरी के अनुसार 23 अप्रैल की सुबह करीब साढ़े दस बजे पिता की मौत हो गई।

 एंबुलेंस नहीं मिली, कार में ही शव रखकर शमशान के लिए चल पड़े

  रचित जौहरी ने बताया कि उन्होंने अस्पताल वालों से एंबुलेंस की व्यवस्था करने की कहा। मगर, स्टाफ ने एंबुलेंस का इंतजाम करने में असमर्थता जताई। वह अकेले थे, कोई रिश्तेदार भी उनके साथ नहीं था। ऐसे में उन्होंने पिता के शव को कार की पिछली सीट पर रखा। उसे अकेले ही शमशान घाट के लिए लेकर चल पड़े। पिता के अंतिम संस्कार के लिए अर्थी सजाने से लेकर सारा इंतजाम उन्हें अकेले ही करना था।

ऐसे में वह आगरा कालेज के सामने क्षेत्रीय बजाजा कमेटी कार्यालय पहुंचे। वहां से अर्थी समेत अंतिम संस्कार का सारा सामान लिया। अर्थी को उन्होंने कार की छत पर रख लिया। जिसका फाेटो वहां मौजूद कुछ लोगों ने अपने मोबाइल से ले लिया था। इंटरनेट मीडिया में यही फोटो वायरल हुआ था। रचित के अनुसार कार की छत पर सिर्फ अर्थी थी। जबकि शव कार की पिछली सीट पर रखा हुआ था।   

 

 

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